Wednesday, February 6, 2019

नोटबंदी के बाद पुराने नोट जमा करने के 1.5 लाख मामलों की जांच, गुजरात के लोग सबसे आगे

ऐसे समय में जब नोटबंदी की विफलता को लेकर मोदी सरकार राजनीतिक हमलों का सामना कर रही है, इनकम टैक्स विभाग नोटबंदी के बाद बड़ी रकम जमा करने के 1.5 लाख मामलों की जांच कर रहा है. ये ऐसे मामले हैं जिनमें बड़ी संख्या में 500 और 1000 के पुराने नोट जमा किए गए और ये कहां से आए, यानी इस कमाई का स्रोत क्या है, यह स्पष्ट नहीं है. ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने पहले ऐसी किसी आमदनी की घोषणा नहीं की थी. दिलचस्प यह है कि इस मामले में साल 2017-18 से 2018-19 के दौरान पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात के लोग सबसे आगे हैं.

आयकर विभाग ने साल 2017-18 के दौरान बैंकों में बड़ी रकम जमा करने के 20,088 मामलों की जांच शुरू की है. ये मामले नोटबंदी के दौरान (8 नवंबर 2016 से 31 दिसंबर 2016) बड़ी रकम जमा करने के हैं, जब 500 और 1000 के पुराने नोट अवैध घो‍षित करने के बाद बैंक में जमा किए जा रहे थे. साल 2017-18 से 2018-19 के दौरान पुराने नोट जमा करने संबंधी सबसे ज्यादा मामले जांच के लिए गुजरात से आए हैं.

साल 2018-19 के दौरान आयकर विभाग के पास जांच के लिए ऐसे 1,34,574 मामले चुने गए. साल 2017-18 के दौरान आयकर इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 142 (1) के तहत 2,99,937 जमाकर्ताओं को नोटिस भेजा गया, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी रकम जमा की थी, लेकिन इनकम टैक्स रिटर्न नहीं दाखिल किया.

गौरतलब है कि आयकर विभाग को यह आशंका पहले से थी कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद काला धन रखने वाले लोग बड़ी मात्रा में पुराने नोट बैंक में जमा करने की कोशिश करेंगे, इसलिए विभाग ने इस पर अंकुश के लिए तमाम कदम उठाए थे. सबसे पहले यह नियम आया कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर, 2016 के बीच 2.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा के लिए PAN अनिवार्य होगा. लेकिन लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया था और 50 हजार रुपये से कम के टुकड़े-टुकड़े में जमा करते रहे. इसके बाद एनुआल इनफॉर्मेशन रिटर्न रूल (AIR) में बदलाव किए गए. बैंकों और पोस्ट ऑफिस के लिए यह अनिवार्य बनाया गया कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर, 2016 के बीच बचत खाता में 2.5 लाख से ज्यादा नकद जमा और चालू खाते में 12.5 से ज्यादा नकद जमा के लिए AIR हो यानी आयकर विभाग को इसक जानकारी दी जाए. इन सबकी वजह से ऐसे सभी बड़ी जमाओं का पता लग गया जिनके आय का स्रोत स्पष्ट नहीं था.

संसद में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने इस बारे में आंकड़ा दिया था कि किस राज्य में ऐसे जांच वाले कितने मामले हैं. उन्होंने बताया था कि 2018-19 के दौरान इस मामले में सबसे आगे गुजरात था. इसके बाद कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हैं. साल 2017-18 के दौरान तमिलनाडु सबसे आगे था, जिसके बाद गुजरात का स्थान था.

Monday, February 4, 2019

आरकॉम का शेयर इंट्रा-डे में 54% लुढ़का, दिवालिया प्रक्रिया में जाने के ऐलान का असर

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के शेयर में सोमवार को 54% गिरावट आ गई। एनएसई पर यह 5.30 रुपए के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया। बीएसई पर शेयर 48% गिरावट के साथ 6 रुपए पर पहुंच गया। हालांकि, निचले स्तरों से शेयर में रिकवरी आई लेकिन फिर भी 35% नुकसान के साथ बंद हुआ। कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से आरकॉम ने शुक्रवार को कहा था कि वह दिवालिया प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। इसलिए कंपनी के शेयर में सोमवार को तेज गिरावट आ गई।

ग्रुप की दूसरी कंपनियों के शेयरों में 29% तक गिरावट
अनिल अंबानी की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी सोमवार को तेज गिरावट आ गई। रिलायंस पावर 29.22% टूट गया। रिलायंस कैपिटल में 19.37% नुकसान दर्ज किया गया। रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर 16.51% और रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग में 13.70% गिरावट आ गई।

एनसीएलटी में अर्जी दायर करेगी आरकॉम

नकदी के संकट से जूझ रही अनिल आरकॉम संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने में विफल रही है। ऐसे में कंपनी के बोर्ड ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के जरिए फास्ट-ट्रैक रेजोल्यूशन प्रोसेस में जाने का विकल्प चुना है। कंपनी बोर्ड का मानना है कि यह कदम सभी संबंधित पक्षों के हित में होगा। इससे 270 दिन की तय अवधि में आरकॉम की संपत्ति बेचकर कर्ज के भुगतान की पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित हो सकेगी।

आरकॉम पर 46,000 करोड़ रु. का कर्ज है। कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि बोर्ड ने संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने की योजना की समीक्षा की। इसमें पाया कि 18 माह बाद भी प्रस्तावित योजना से कर्जदाताओं को कुछ नहीं मिल पाया है। यह योजना 2 जून 2017 को बनाई गई थी।

आरकॉम की जियो के साथ डील अटकी
आरकॉम को असेट बेचकर 25,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी। वहीं, टेलीकॉम विभाग की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से आरकॉम और जियो की डील भी अटकी हुई है। इससे 975 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी। इसमें से उसने 550 करोड़ रुपए एरिक्सन को और 230 करोड़ रुपए रिलायंस इन्फ्राटेल को चुकाने का वादा किया था।

भारतीय टीम ने एशिया के बाहर टेस्ट खेलने वाले देशों में पहली बार 4-1 के अंतर से सीरीज जीती है। एशिया के बाहर कनाडा (टेस्ट नहीं खेलता) में भारत 4-1 से सीरीज जीत चुका है। 1997 में उसने पाकिस्तान को हराया था। टीम इंडिया ने कुल पांचवीं बार विदेश में द्विपक्षीय सीरीज इस अंतर से जीती है। इससे पहले श्रीलंका में 2009 और 2012 में और पाकिस्तान में 2006 में 4-1 से जीत हासिल की थी।

दो बड़ी पार्टनरशिप ने संभाली भारतीय पारी
भारत की लड़खड़ाती पारी को दो बड़ी साझेदारी ने संभाला। पहली सबसे बड़ी 98 रन की पार्टनरशिप अंबाती रायडू और विजय शंकर के बीच पांचवें विकेट के लिए हुई। शंकर के आउट होने के बाद छठवें विकेट के लिए मैच की दूसरी बड़ी साझेदारी रायडू और केदार जाधव के बीच 74 रन की हुई।

फिर फेल हुआ टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर
इससे पहले मैच में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया था। टीम की शुरुआत बेहद खराब रही थी। भारत ने 18 रन पर ही अपने चार विकेट खो दिए थे। हालांकि मिडिल ऑर्डर में रायडू, शंकर, पंड्या और जाधव ने टीम का स्कोर 250 पार ले जाने में अहम भूमिका निभाई। न्यूजीलैंड की ओर से मैट हेनरी ने 4 और ट्रेंट बोल्ट ने 3 विकेट लिए। बोल्ट ने इस सीरीज में अब तक सबसे ज्यादा 12 विकेट लिए हैं।

肺炎疫情在纽约:抗疫前线的24小时

上周二,新冠 肺炎 疫情在美国 伴随武汉解封, 色情性&肛交集合 中国的新冠肺炎疫 色情性&肛交集合 情似乎正在告 色情性&肛交集合 一段落,人们的 色情性&肛交集合 生活逐渐恢复正常。 色情性&肛交集合 但一本关于 色情性&肛交集合 关于中国疫情的书 色情性&肛交集合 籍却在...